सुखद यादे - काव्य की





सामने हो मंजिल तो रास्ते ना मोड़ना
जो भी मन में हो वो सपना मत तोड़ना
कदम कदम पर मिलेगी मुश्किल आपको
बस सितारे छूने के लिए जमीन मत छोड़ना


पंखो से हौसलों की उडान होती है
बुलनदियों को छू कर वही लोग जाते हैं
जिनके हौंसलों में जान होती हैै.


होसलो को अपने ये मत बताओ,
कि तुम्हारी तकलीफ कितनी बड़ी…
बल्कि अपनी तकलीफ को बताओ,
कि तुम्हारा हौसला कितना बड़ा है…


आंधियो में पेड़ लगाए रखना,दलदल में पैर जमाए रखना,कौन कहता है छलनी में पानी नहीं ठहरता बस बर्फ जमने तक हाथों को थमाए रखना....

मांझी तेरी किस्ती में तलाबदार बहुत है...कुछ उस पार तो कुछ इस पार बहुत है..तूने जिस शहर में खोली है शीशे की दुकान उस शहर में पत्थर के खरीददार बहुत हैं...
कुछ बनो ऐसा की दुनिया बनना चाहे आपके जैसा।।




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