मेरी कहानी मेरी जुबानी पार्ट -3 अभी हल्का हल्का दिन का उजाला ख़त्म हो रहा था और रात का अँधेरा अपने पांव पसारने जा रहा था। रोज की तरह बिजली चली गयी, तो अँधेरा अधिक हो गया, बस इसी अँधेरे का इंतजार हमें होता था क्योकि वही समय होता खेलने। तो हम शुरू हो गए। में एक कोने में जाकर अपनी आँखों पर हाथ रख कर एक से दस तक गिनती गिनने लगा और इसी बीच मेरे सभी दोस्त के साथ राजू भी छुप गया । गिनती पूरी होने के बाद में सब को ढूंढने लगा। एक -एक करके में ठप्पा बोलकर सबको आउट करने लगा तो अचानक पीछे से आकर किसी ने जैसे ही मुझे ठप्पा करने के लिए मेरी पीठ पर छूने के लिए हाथ आगे बढ़ाया और मे उसी वक़्त आहट सुन कर पीछे घुमा तो मेरे सर से उसका सर टकरा गया और मुझे चक्कर आने लगे। मेरी टक्कर किस से हुई अँधेरे में मुझे भी नहीं पता चला, जैसे ही सर में चक्कर आने पर में नीचे झुक कर बैठा, तो मेरे दोस्त यह सोच कर भाग खड़े हुए कि अब मुसीबत आई, अब तो मेरी माँ चिल्लाते हुई वह आएगी। हुआ भी ठीक वैसा भी। मेरी माँ को जैसे ही शोरगुल में यह सुनाई पड़ा कि मुझे चोट...
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