Haar Ya Jeet (Revenge)


हार या जीत   (A Revenge )

"लो माँ, आपकी सहेली की चिठ्ठी आई हैं" ख़ुशी से उमगते हुऐ सविता ने चंदा को उनकी  अन्तरंग सहेली मंदाकनी का पत्र पकड़ाया ! लिफाफे पर चिरपरिचित लिखावट देख चंदा के उदास चेहरे पर पलभर को ख़ुशी की चमक उभरी और फिर विलीन हो गयी, क्योकि लिफाफे पर टिकेट अमेरिका के थे !
"इसका मतलब मंदाकनी अभी तक अमेरिका में ही हैं," वे मानो अपने आपसे बोली! " तो क्या हुआ माँ, आप उनसे फ़ोन पर बात तो कर सकती हैं" सविता बोली! "फ़ोन पर?" चंदा कुछ असमंजस में थी, "फ़ोन तो बहुत महंगा पड़ेगा!"
"तो क्या हुआ माँ, आपको उनसे बात करके ख़ुशी तो होगी न?"
कहते हुऐ सविता ने लिफाफा खोल कर चंदा के हाथ में पत्र पकड़ा दिया!
पत्र पड़ते पड़ते अचानक  चन्दा का चहरा गंभीर हो उठा, माथे पर चिंता की लकीरे खीच आयी और आधा पड़ा पत्र उसने मोड कर रख दिया! उसके बाद  सोफे पर सर टिका कर आंखे बंद कर ली!
उनके सभी मनोभावों को सविता बड़े गौर से देख रही थी! अभी तक सही मायनो में वह अपनी सास को समझ नहीं पाई  थी, क्योकि उसका विवाह हुऐ कुल एक ही साल हुआ था! अपने पति सुबोध से वह इस बारे में बात नहीं करती थी, क्योकि सुबोध का कहना था की कुछ समय माँ की साथ रहने की बाद ही वह उन्हें ठीक से समझ पायेगी और अभी तो चंदा को यहाँ सविता के पास आये कुल २० ही दिन हुऐ थे! मेरट से अपनी पढाई पूरी करने के बाद सुबोथ को पहली नौकरी  की एक छोटी सी कंपनी मे मिली! कंपनी के अन्य ४ लोगो के साथ मिल कर एक छोटा सा फ्लैट किराये पर ले कर रहने के बाद उसने किस्तों पर एक मकान  बैंक की लोन की मदद से ले लिया और शादी के बाद सविता को लेकर यहाँ आ गया! माँ को साथ चलने को कहा, तो वे बोली," कोई घर की देखबाल करनेवाला मिल जाए, तो मै आ जाउंगी!"
लेकिन चंदा अधिक दिनों तक अपने बेटे-बहु से अलग न रह सकी! ले दे कर एक ही तो बेटा था, पति के न रहने पर उसे का हाथ थामे जी रही थी! इसलिए पड़ोस में रहनेवाले भसीन साहेब ने जब कहा कि उनका बीचवाला बेटा रात को चंदा के यहाँ सो जायेगा, बीच-बीच में उनकी कामवाली घर कि सफाई कर देगी और बिजली पानी के बिल भसीन साहेब खुद जमा कर दिया करेगे, तो चंदा आश्वस्त हो गयी और घर कि चाबी उन्हें दे कर यहाँ बेटे के पास दिल्ली आ गयी! उनके आने से सविता को आराम हो गया! उसे अभी तक ठीक से घर तक संभालना आता नहीं था और खाना सुबोध की पसंद का वह बना नहीं पाती थी! चंदा ने बड़े प्यार से सविता को सब सिखाना-समझाना शुरू किया तो,  दोनों के बीच अनायास ही प्यार का पौधा पनपने लगा.
जब सविता को लगा कि माँ अपनी  सहेली का पत्र पढ़ने के बाद से परेशान हैं, तो उससे रहा नहीं गया! सुबोध से बोली, " कहो तो मैं माँ से पुछु कि ख़त में ऐसा क्या लिखा हैं, जिससे वे इतनी परेशान हैं! उनका उदास चेहरा मुझसे देखा नही जाता!"
"भले ही पूछो, लेकिन सोच-समझ किसी भी बात से माँ का दिल दुखे ऐसा मैं नहीं चाहूँगा"
"ओ हो, जैसे मैं तो जानती ही नहीं माँ को," सविता आंखे नचा कर बोली " मैं माँ की हंसी वापस ले आउंगी! तुम आराम से अपने दफ्तर जाओ," और उसने सुबोध के हाथ में टिफ़िन पकड़ा दिया! हँसते हुऐ सुबोध टिफिन का डिब्बा पकड़े बाहर आ गया!
सुबोध के जाने के बाद दरवाजा बंद कर सविता दबे पांव माँ के कमरे में चली गयी ! चंदा दिवार की और मुहं किये करवट ले लेटी थी! सविता को लगा माँ सो रही हैं! तकिये के पास मुड़ा हुआ पत्र रखा था ! तभी चंदा ने करवट बदली और कमरे में सविता को देखा, तो उठ कर बैठ गयी और उसका हाथ  हाथ में लेकर बोली' "माँ, ऐसा  ख़त में क्या हैं, जिसने आपको इतना उदास कर दिया हैं! आपका उदास रहना मुझे अच्छा नहीं लगता!"
इन थोड़े से दिनों के संग साथ में ही चंदा अपनी बच्चो जैसे स्वभाववाली बहु का अंदर बाहर सब पड़ चुकी थी! प्यार उसके सर पर हाथ फेरते हुऐ बोली, " यह मेरी बहुत प्यारी सहेली का पत्र हैं ! हमने बचपन और जवानी का बहुत सा समय इकट्ठा ही गुजारा हैं, क्योकि हम दोनों देहरादून में आस-पास में ही रहते थे ! फिर हमारी शादिया हो गयी और हम अलग हो गए ! में मेरठ आ गयी और उसकी शादी देहरादून में हो गयी ! इधर कई सालो से नहीं मिले हैं, फिर भी हम एक-दुसरे को ख़त जरूर लिखते हैं! पिछले साल वह अमेरिका चली गयी, क्योकि उसका बेटा अमेरिका में ही हैं! मैं सोचती थी वह वह बहुत खुश होगी, लेकिन ऐसा नहीं हैं, बहुत उदास परेशान हैं वह"
"लेकिन क्यों माँ ?" सविता ने अपनी सवालिया निगाहे माँ के चेहरे पर गड़ा दी!
चंदा कुछ पल उसकी और देखती रही, फिर बोली " तुम सब जानना चाहती हो बेटी, तो लो यह ख़त पढ़ो और हा चुपचाप बैठ कर पढ़ना! में अब सोउंगी! मुझे जगाना मत" और चंदा ने मोटा सा पत्र उसके हाथ में पकड़ा दिया!
सविता ने माँ के कमरे की खिड़की का पर्दा खीच दिया और पत्र लेकर अपने कमरे में आ गयी! बिस्तर पर पड़े कपडे अलमारी में टाँगे और फिर खुद भी माँ की तरह ही आराम से बिस्तर पर लेट कर पढने की लिए पत्र खोला ---
प्रिय चंदा
तुम आज बहुत याद आ रही हो, में इस समय अमेरिका में मिशिगन स्टेट के एक छोटे से शहर एन आर्बर में बैठी हूँ ! बेहद घिरा-घिरा सा मौसम हैं लगभग अँधेरा सा, लेकिन मेरे दिल का अँधेरा इससे से घना हैं ! याद हैं चंदा जब हम तुम दोनों एक साथ स्कूल में पड़ते थे जहा से हमारी पक्की दोस्ती की शुरुआत हुई थी ! आज यहाँ का मौसम बिलकुल वैसा ही हैं जस की देहरादून में हुआ करता था और हम दोनों मोटे-मोटे ओवरकोट डाल कर लम्बी-लम्बी सड़को पर हाथो में छाता पकड़े निकल पड़ते थे ! बड़े ही अच्छे दिन थे वे, बहुत याद आते हैं !
लेकिन आज? आज जिन अंधेरो से मैं  जूझ रही हू तुम अंदाजा नहीं लगा सकती  हो ! तुम तो यही सोचती होगी कि मैं यहाँ खुश हू पर सच कहू चंदा अमेरिका  की अमीरी कि अपेक्षा भारत की गिरीबी अच्छी हैं, जहा मानवीय मूल्यों को पैसो की कसोटी पर नहीं कसा जाता, जहा प्यार सिर्फ प्यार होता हैं ! उनसे कोई लेना देना नहीं होता और जहा पत्नी अपने पति से एक कदम पीछे रहने में अपना सम्मान समझती हैं!
तुमसे सब  कुछ कहने को दिल कर रहा हैं आज! अपने मन पर इतना भारी बोझ और अधिक नहीं सह सकती! मेरा इकलोता बेटा असीम और उसकी पत्नी सीमा एक-दुसरे से अलग होने की सोच रहे हैं! चौंक गयी ना ? शादी के २२ साल एक साथ गुजारने के बाद और २ प्यारे-प्यारे बच्चो के माता-पिता बनने के बाद ! बच्चे इतने समझदार है तुम्हे क्या बताऊ! बेटा अनंत स्कॉलरशिप लेकर यूनिवर्सिटी मैं पड़ रहा हैं ! शुरू से ही वह गंभीर प्रवृति का था और पड़ने में बेहद होशियार! आसीम का कहना हैं कि अब उसे अपने बेटे के भविष्य से कोई चिंता नहीं है ! बेटी सोभ्या मेडिकल कि पढ़ाई कर रही हैं और उसने अपंक मर्जी से विवाह कर लिया हैं! गनीमत हैं कि लड़का इंडियन हैं, वह सोभ्या के साथ ही पड़ता हैं और उससे १ साल बड़ा हैं! अपने बेटे बहु की भरीपूरी गृहस्थी देख कर यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि इन दोनों के बीच क्या चल रहा हैं ! ऊपर से सब समान्य हैं ! मिलने वाले लोग आते-जाते है, यह दोनों अपने-अपने काम पर जाते हैं, बच्चे भी आते हैं लेकिन एक बात से परेशान थी कि दोनों अलग-अलग कमरों में सोते हैं और आपस में हँसते-बोलते भी कम हैं ! दोनों के कमरे में अपने अपने कंप्यूटर हैं! अपना-अपना टीवी और अलग-अलग फ़ोन, ताकि एक की बात दूसरा न सुन सके! बस खाना साथ बैठ कर खाते हैं वह भी शायद मेरी वजह से! अजीब सा सूनापन हैं सारे घर में ! कमी किसी चीज की नहीं हैं, न खाने पिने की, न ही ऐशो - आराम की! मेरे लिए भी लिविंग रूम में बड़ा सा टीवी हैं , जिसमे इंडियन चैनेल आते हैं, लेकिन जब भी मेरे मन में चैन न हो तो, टीवी या इंडियन चैनेल का क्या करू ?
एक दिन मेरी पोती सोभ्य आई ! उससे जब मैंने कहा कि उसने इस तरह से पढ़ाई पुरे करे बिना ही शादी क्यों की ! तो उसकी आंखे भर आयी और वह मेरे सीने से लग गई और बोली, "दादी, डैड और माम् एक-दुसरे से तलाक ले रहे है और उनका आपस में कॉन्ट्रैक्ट हैं कि जब मैं और भाई अपने कर्रिएर में सेट हो जाये और मेरी शादी हो जाये तब वे अलग रहेगे ! दादी, मैं रजत को बहुत चाहती हूँ लेकिन उसे घर वाले बहुत ओल्ड फैशन हैं ! यदि मेरे मौम डैड एक दुसरे से अलग रहेगे, तो वे लोग रजत को कभी शादी नहीं करने देते, इसलिए हमने जल्दी शादी कर ली ! उसके मम्मी- डैडी आपके आने की वजह से एक साथ रह रहे हैं," कहते हुऐ सोभ्या बुरी तरह से सुबकने लगी!
सच मानो चंदा, यह सब अपनी पोती के मुह से सुनकर मैं तो जैसे आसमान से गिर गयी !समझ नहीं आता की क्या करू, किससे क्या कहूँ ? एक तू ही हैं, जिससे कुछ कह सकती हूँ ! क्या मुझे यहाँ से चले जाना चाहिए ? सोभ्य कहती हैं जब तक में यहाँ रहूंगी ये दोनों अलग रहना शुरू नहीं करेगे, इसलिए बार-बार कहती हैं दादी आप यही रहिये यहाँ से मत जाए ! ख़त का जवाब जल्दी देना ! --तेरी अपनी मंदा.
पूरा ख़त पड़कर सविता तो भौंचक्की से रह गयी ! बहुत सुना था अमेरिका के बारे में, लेकिन वह ऐसा भी होता हैं यह पहली बार जाना! सोभ्या के डैडी पर बहुत गुस्सा आया, ऐसा भी कोई करता हैं क्या ?
उसी गुस्से में ख़त लिए वह चंदा के पास पहुची और बोली " माँ आप अभी अपनी सहेली को फ़ोन करिए और उसे कहिये उन दोनों का झगडा सुलझाये ! अपनी माँ का कहना तो उन्हें मानना ही पड़ेगा न"
चंदा ने प्यार से सविता का हाथ पकड़ का पास बिठा लिया और बोली "फ़ोन तो बहुत महंगा पड़ेगा बेटी, मैं ख़त लिख देती हूँ !"
"नहीं माँ, आप समझ नहीं रही आपकी सहेली बहुत परेशान हैं, आप फ़ोन कर ले" और सविता ने फ़ोन लाकर माँ के हाथ में पकड़ा दिया! मंदाकनी ने अपने ख़त में उपर पते के निचे ही अपने फ़ोन नंबर लिख दिया था ! चंदा ने फ़ोन लगया तो मंदाकनी ने ही उठाया, बेहद ख़ुशी और अचरचभरी आवाज में बोली, " अरे चंदा तू? में तो सोच ही नहीं सकती थी की तू मुझे फ़ोन करेगी !"
"मंदा ख़त तो में तुझे लिख ही रही हूँ, पर तेरा वहा  बने रहना जरूरी हैं ! तुझे बहु से बात करनी चाहिए की समस्या क्या हैं और उसका हल ढूँढना चाहिए, इस तरह से बसा-बसाया घर टूटना नहीं चाहिए"
"ठीक हैं चंदा, में बहु से बात करके तुझे ख़त लिखूंगी ! बच्चो को प्यार देना" और फ़ोन बंद हो गया!
शाम दो जब सुभोध घर आया, तो अपनी पत्नी की समझदारी पर हैरान ही रह गया ! जिसे वह कम अक्ल समझता था उसे माँ की समस्या को हल करके उसके चहरे की मुस्कान वापस ल दी ! उदासी के बादल उसके चहरे से हट चुके थे और वे सविता को रसोई में करी बनाना सिखा रही थी!
जल्दी ही मंदाकनी  का दूसरा पत्र भी आ गया ! डाक में पत्र देखते ही हाथ में पत्र पकडे भागी भागी आयी और चंदा के हाथ में देकर बोली "लो माँ आ गया जवाब ! देखा एक फ़ोन से कितना जल्दी हो गया सब! आप  आराम से पढो में नहाने जा रही हूँ !" चंदा ने पत्र खोला लिखा था ---

प्रिय चंदा प्यार, ऐसा लगता हैं मेरी परेशानिया अब शुरू हुई हैं! बहु से बात करना आसन नहीं था ! वह बड़ी मुश्किल से मेरे साथ खुली और जो कुछ उसने मुझे बताया उसे सुन कर मेरा सर शर्म से झुक गया कि मेरा अपना बेटा ऐसा भी वयवहार भी कर सकता हैं ! तुम तो जानती हो मेरे बेटे आसीम को बेहद खुबसूरत पत्नी कि चाह थी ! न जाने कितनी लडकियों को देखने के बाद जाकर उसने सीमा को पसंद किया था और सच तो यह हैं कि आज भी सीमा उतनी ही सुंदर हैं जितनी विवाह के समय थी ! लेकिन अब यही सुन्दरता उसके जी का जंजाल बन गयी हैं ! वह हर समय  उस पर शक करता है ! और सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि वह दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं! यदि आसीम के दोस्त सीमा से बात करते हैं, तो उसे अच्छा नहीं लगता! घर आ कर वह सीमा को भला-बुरा कहता है कि वह उसके मित्रो को बढ़ावा देती हैं ! सीमा का कहना है कि यदि कोई उससे बात करता है तो शिष्टाचार के नाते उसकी बातो का उतर देना ही होता है! इसी तरह वह जब भी किसी पार्टी में जाती है, तो भी असीम साये की तरह उसके आगे पीछे मंडराता रहता है की वह किसके साथ बात कर रही है ! इन पार्टियों में डांस भी कभी कभी होता है ! ऐसे यदि असीम के अलावा उसे किसी और के साथ डांस करना पड़ जाये, तो वह भड़क जाता है ! ऐसी ही एक बहसबाजी के बीच उसने एक दिन सीमा के मुहं पर चांटा मार दिया ! बस उसी समय सीमा ने कह दिया कि मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकती ! जिस दिन मेरे बच्चे बढ़े हो जायेगे, में उस दिन तुम से अलग हो जाउंगी ! इस पर असीम का जवाब था कि तब तक के लिए क्यों रूकती हो मैं इसी समय तुम्हे छोड़ता हूँ ! मेरा कमरा अलग और तुम्हारा कमरा अलग! तलाक की कानूनी कार्यवाही भी जल्दी ही पूरी कर लेते है ! तुम्हे अपनी खूबसूरती पर बहुत नाज हैं न, तो बहुत मिल जायेगे तुम्हारे नखरे उठने वाले!
सीमा का कहना है कि दफ्तर में अपने काम से काम रखती हैं और लोगो से जरूरतभर की ही बातचीत करती हैं, लेकिन सबसे मिलजुल कर रहती है, जिसके कारण उसके साथ काम करने वाले उसे पसंद करते है ! उसका बॉस उसके काम से बहुत खुश है, इसलिए उसे जल्दी परमोशन भी देता है ! इस पर असीम का कहना है उसका बॉस उसे अपने बिज़नस डीलिंग के लिए इस्तेमाल करता है ! सीमा का कहना है कि यह इल्जाम बेहद घिनोना और बेबुनियाद है !

सच मानो चंदा जब वह मुझे बताते हुऐ रो पड़ी, तो मुझे असीम पर बेहद क्रोध आया! मैंने सीमा को अपने सीने से चिपटा कर दिलासा दिया कि में उसके साथ हूँ और अपने बेटे को उसकी इन हरकतों के लिए हरगिज मांफ नहीं करुँगी ! तुम्हारे साथ जो भी नाइंसाफी कर रहा है इसके बारे में उससे बात करुँगी!
फिर अगले दिन मैंने असीम से बात की ! पहले तो वह बहुत अचकचाया कि सीमा ने मुझे इतना कुछ बता दिया है, फिर गुस्से से बिफर कर बोला, "ठीक है जब उसने तुम्हारे सामने हमारे इस रिश्ते को नंगा कर ही दिया है, तो तुम भी सुन लो माँ कि मैं उसका घमंड तोड़ कर ही रहूँगा ! बड़ा घमंड है न उसको अपनी खूबसूरती पर!"
मुझे भी गुस्सा आ गया चंदा और मैंने कहा, " याद करो शादी के वक़्त तुम्हारी ही जिद थी, खुबसूरत लड़की के लिए, तुम अपना घर तोड़ रहे हो ? तुमसे बड़ा कोई और बड़ा बैवकुफ होगा भला ? नालायकी कि भी हद  होती है ! खैर तुम जो भी नाइंसाफी कर रहे हो ! उसमे में तुम्हारा नहीं उसका साथ दूंगी इसे याद रखना !" यह सब कहते हुऐ मुझे इतना गुस्सा आ रहा था कि मन किया कि उसके मुहं  पर तमाचा मारू, जैसा उसने सीमा के मुहं पर तमाचा मारा था, लेकिन चंदा क्या में अपने ५२ बरस के बेटे पर हाथ उठा सकती थी ? नहीं न ?
खैर, अब यह ख़त डाक में डाल रही हूँ, मिलने हो सके तो उस दिन की तरह बात कर लेना, मेरे दिल की तसल्ली हो जायगी कि मेरा कोई भी है ! तुम्हारी बहु सचमुच बहूत प्यारी है, जो इस तरह से तुम्हे जोर देकर तुमसे फ़ोन करवाती है१ बहु तो मेरी बहुत प्यारी है, लेकिन मेरा बेटा ही शक और जलन का शिकार होकर उसे दुखी कर रहा है ! अगला ख़त शयद जल्दी न लिखू, जब इन मसलो का हल नजर आयेगा तभी लिखूंगी ! इस घर को बचाने की कोशिश में लगी हूँ ! बेटे-बहु को मेरा आशीर्वाद देना !
 प्यार सहित तुम्हारी मंदा !


ख़त को चंदा दो दिन तक रखे रही और न जाने कितनी बार पढ़ा ! फिर उसने वह ख़त सविता को दे दिया और कहा की सुबोध को भी ख़त पढ़वा दो ! दरअसल चंदा अपने बेटे-बहु की राय जानना चाहती थी, लेकिन उन दोनों को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कैसे इस समस्या का हल निकलेगा ! यकीनन घर तोड़ना इस समस्या का हल नहीं था ! ऐसे में १५-२० दिन निकल गए ! चन्दा ने मंदाकनी को फ़ोन भी नहीं किया, क्योकि उसकी समझ में नहीं वह उसे क्या कहे !
फिर आचानक २२ दिन बाद मंदाकनी का पत्र आया! लिखा था ---
प्यारी चन्दा, कल मेरा पोता अनन्त मुझसे मिलने आया था ! जब उसने फ़ोन पर मुझसे बताया कि वह मुझसे मिलने आ रहा है, तो मैंने उससे कहा कि वह सोभ्या मेरी पोती को भी साथ लाये, क्योकि मुझे उन दोनों से बात करनी थी ! और जब दोनों बच्चे आये, तो यकीं मानो चन्दा मुझे लगा कि उनके माँ-बाप के आपसी रिश्तो में घुली कड़वाहट ने उन्हें समय से पहले गंभीर बना दिया, और हो भी क्यों ना ? जो बच्चे अपने अपने घर में आये दिन इन झगड़ो को देखते है उनका बचपन तो उनमे ही दफ़न हो कर रह जाता है ! जब मैंने उन दोनों से बात की, तो पता चला वे दोनों ही अपने डैडी से नाराज है और अपनी माँ से उन्हें पूरी हमदर्दी है ! चंदा बच्चे हमेशा भगवन का रूप होते है और उनकी आत्मा हमेशा सच की गवाही देती  है ! बस मैंने उसी पल फैसला कर लिया कि मुझे क्या करना है! मैंने उन दोनों को रात को रुकने को कहा तो वह मान गए!
शाम ८ बजे सीमा भी आ गयी, बच्चो को देख कर बहुत खुश हुई, लेकिन उसका सुन्दर चेहरा भी उस ख़ुशी में उदास लग रहा था ! थोड़ी ही देर में आसीम भी आ गया फिर सभी ने मिल कर खाना खाया ! कहाँ खाने के बाद आसीम टीवी देखने बैठ गया तो मैंने उसी वक़्त टीवी को बंद करने के बाद आसीम से कहा कि मुझे उससे बात करनी है ! यह वाक्य मैंने उससे आदेशात्मक लहजे कहा तो आसीम हैरानी से बोला " क्या बात है माँ क्या बात करनी है तुम्हे ?
"मुझे यह कहना है कि सीमा के प्रति तुम्हारे इस रवैये से बेहद शर्मिंदा हु और इसलिए मेरा यह फैसला है कि देहरादून की कोठी और बैंक में जमा सारी जमापूंजी, सीमा और बच्चो के नाम करना चाहती और तुम्हारा उसमे कोई हिस्सा नहीं होगा !"
"क्या ? आसीम लगभग चीख कर बोला, " आप  हरगिज ऐसा नहीं कर सकती और आप ऐसा कर भी नहीं सकती हो ! डैडी का वारिस में हु सीमा नहीं !"           
" हां, लेकिन अब कोठी और सारे बैंक अकाउंट मेरे नाम है और यह मरी मर्जी है कि किसे में क्या दू ! "
मेरा नॉमिनेशन भी तो उन कागजो में कही न कही होगा " आसीम बोला !
" नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है" मैंने सख्त लहजे में कहा !
 आसीम सर  पकड़ कर बैठ गया ! शायद उसकी आँखों के सामने देहरादून की कोठी घूम रही थी, जिसका दाम २ साल पहले २ करोड़ लग चुका था !
इधर सीमा सर झुकाए बैठी थी, शायद वह खुद को अपराधी महसूस कर रही थी ! दोनों बच्चे भी खामोश थे ! आखिर सीमा ने कहा " माँ मुझे यह सब कुछ नहीं चाहिए, मेरी नौकरी काफी है मेरे लिए, जिसका हक़ है आप उसे ही दे! "
"नहीं" मैंने तेज आवाज में कहा, " जिस दिन में तुमे इस घर में बहु बना कर लायी तुमे भी इस घर की हक़दार हो गयी, आज तक तुमने मुझे नहीं बताया कि तुम्हारे साथ क्या नाइंसाफी होती रही ! तुमने बच्चो को अच्छा पाल-पोस कर बड़ा किया, उन्हें अच्छे संस्कार दिए और मेरा बेटा इन सब के बदले में तुम्हे तलाक देगा ? कर लेने दो उसे अपने मन की ! में तुम्हे इंडिया ले जाउंगी ! तुम्हारी बेटी की शादी हो चुकी है ! बेटा अपने कर्रिएर में आगे बड़ रहा है, जरूरत पड़ने पर इंडिया से पैसे भेज देंगे! मेरे पास जो पैसे है वो किस काम के है ! तुम्हे इंडिया में नौकरी मिल जायगी अगर तुम करना चाहोगी, लेकिन तुम्हे जरूरत नहीं है, इश्वर की किरपा से अपने पास बहुत कुछ है !"
सच मनो चन्दा, इतना कुछ कहने में मैं हाफ्ने लगी, और मेरा बेटा मुझे खा जाने वाली नजरो से घूर  रहा था ! शायद उसे उम्मीद नहीं थी कि अपनी पत्नी के साथ उसकी लड़ाई में उसकी अपनी माँ ही उसे शिकस्त देगी, मैंने जो भी किया अपनी अंतरात्मा की आवाज पर किया ! जिस दिन में सीमा को अपनी बहु बना कर लायी थी वह उसी दिन मेरी बेटी बन गयी थी! अब देखती हूँ इन सब का क्या नतीजा निकलता है ! प्लीज इस बार ख़त मिलते ही मुझे फ़ोन करना ! प्यार सहित तुम्हारी मंदा!
और जैसा की मंदा ने लिखा था चन्दा ने उसे उसी समय फ़ोन करने लगी, लेकिन फिर इंडिया और अमेरिका के समय का अंतर याद आया कि इस समय तो वहा आधी रात होगी, इसलिए उसे रुकना होगा !
रात को खाना आदि निपटाने के बाद चन्दा ने अपनी बहु को ख़त पढ़वाया तो उसने उसी समय फ़ोन नंबर मिला कर रीसीवर  अपनी सास के हाथ में पकड़ा दिया !
" हेलो, " उधर से मंदाकनी का स्वर उभरा !
" हेलो मंदा, मैं बोल रही हूँ  चन्दा ! तेरा ख़त मुझे आज ही मिला, लगभग १३ दिन बाद"
"आरे चन्दा, तुझे मालूम नहीं इन १३ दिनों में यहाँ क्या-क्या हो गया ! तूने ख़त तो पढ़ ही लिया होगा ! पहले तो बेटे न मुझे धमकी दी कि वो सारे सम्बन्ध मुझ से तोड़ लेगा, कभी इंडिया नहीं आएगा आदि आदि ! खैर मैंने  भी कह दिया जो करना है कर लो ! फिर भाग्य की मार देखो उसकी नौकरी जाती रही ! सीमा और वह एक ही ऑफिस में है, उन दोनों का अलग अलग डिपार्टमेंट है, सीमा मैनेजमेंट में है और आसीम सेल्स में ! अमेरिका में इस समय मंदी का बहुत बुरा दौर चल रहा है और चीजे बिक नहीं रही है तो सेल्स साइड के लोगो की छटनी हो रही है ! आसीम की टीम के ७ लोगो को हटा दिया गया और उसे चपेट में आसीम भी आ गया ! सारी बातें कर के तेरा बिल नहीं बढ़ाउंगी ख़त लिख रही हूँ"  और फ़ोन रख दिया !
पास बैठी सविता को जब चन्दा ने यह बताया तो उसने बड़े भोलेपन से अपनी सास के  गले में बांहे डाल कर कहा, देख लिया न माँ बुरे काम का बुरा नतीजा" और फिर सुबोध को यह खबर देने भाग गयी, जो दूसरे कमरे में बैठा टीवी देख रहा था !
मंदाकनी के ख़त के इन्तेजार में चन्दा के दिन बड़े बेचैनी में कट रहे थे ! उसके घर में चल रही उथल पुथल का अंजाम क्या चल रहा था वह सोच ही नहीं प् रही थी ! आखिर १२ दिन बाद मंदाकनी का पत्र सविता ने देखा तो भागती हुई चन्दा के पास पहुची और बोली " देखो माँ आपकी सहेली का पत्र आ गया, देखो तो इसमे क्या लिखा है " और अपने चहरे पर उत्सुकता के भाव लिए वह भी चन्दा के साथ सट कर बैठ गयी मनो वह भी पत्र का हर अक्षर साथ पढ़ लेना चाहती हो ! लिखा था ---
प्रिय चन्दा, तुम्हे यह जान कर ख़ुशी होगी कि में जल्द ही इंडिया आउंगी ! अभी दिन और तारीख तय नहीं है पर यह जरूर तय है कि में सीमा और आसीम के साथ इंडिया आ रही हूँ ! अनंत और सोभ्या कि छुट्टिया ना होने के कारण वे बाद में आयेंगे ! सीमा ने छुट्टी के लिए एक महीने की अर्जी दी है, यदि एक महीने की छुट्टी मिल गयी तो ठीक नहीं तो १५-२० दिन रह कर लोट आएँगी ! जहा तक आसीम का सवाल है वह यहाँ के जगह नौकरी की कोशिश कर रहा है हालिका यहाँ मंदी का बहूत बुरा दौर चल रहा है ! इसे अभी ठीक होने में वक़्त लगेगा ! लेकिन तुझसे सच कहु चन्दा इश्वर ने कुछ आच्छा ही सोचा है, उसने मेरे बेटे के परिवार को बिखरने से बचा लिया है ! आसीम का व्यवहार सीमा के साथ काफी सुधर गया है ! सीमा ने तो अपना आत्मबल बनाये रखा है और कभी भी अपने पति, बच्चो और मुझे शिकायत को मौका नहीं दिया ! में जानती हू वह इस परीक्षा में खरी उतरेगी ! सोभ्या और अनंत कहते है " दादी माँ, आप अब हमारे पास ही रहिये ! आप नहीं आई होती, तो मॉम डैड अलग हो गए होते और हमको सभी के बाते झेलनी होती ! अब हम सर उठा कर चल सकते है ! टूटे- बिखरे परिवार की कोई इज्जत  नहीं होती, दादी  माँ !"
सच चन्दा! इन बच्चो की भोलीभाली बाते सुन कर कलेजा मुंह को आ जाता है ! आसीम कह कह रहा है कि वह राया तो नौकरी तलाश कर रहा है, इंडिया आ कर भी एक बार कोशिश करेगा ! अगर वह हालात अच्छे हैं तो कोई बिज़नस शुरू कर सकता है जिसे बाद में अनंत संभालेगा ! लेकिन कहता है जो भी करेगा सीमा कि सलाह से करेगा ! सच चन्दा बड़े दिनों बाद शांति मिली है ! अब में ख़त शायद जल्दी न लिखू, क्योकि अब लिखने लायक है ही नहीं ! अब तो बस अपने पहुचने की खबर दूंगी फ़ोन पर ! बहुत दिल कर रहा है तुझ से मिलने को ! लेकिन इस बार तुझे ही देहरादून आना होगा मुझ से मिलने को, क्योकि इतने दिन बाद वापस जाने पर बहुत कुछ संभालना होगा, और हा तुम आओ तो मेरी उस प्यारी बहू को को भी साथ में जरूर लाना, हो सके तो बेटे को भी लाना अगर छुट्टी मिल सके तो ! सब लोग एक साथ मिल कुछ दिन एक साथ रहेंगे ! अब बस तुम मेरे फ़ोन का इंतजार करना ! प्यार सहित तेरी मंदा
पूरा ख़त शुरू से अंत तक पढने के बाद चन्दा के चेहरे पर बरबस मुस्कान आ गयी ! उसे लगा जैसे बादलो का घना कुहासा छंट कर धुप खिल उठी हो और उसने पात्र सविता को  पकड़ा दिया !  

शार्ट स्टोरी - "कल क्या होगा किसको पता " जानने के लिए यहाँ क्लिक करे 
आर्टिकल - "आपकी जिंदगी के वो महत्वपूर्ण क्षण " जानने के लिए यहाँ क्लिक करे 
      
लोन सम्बन्धी जानकारी - " क्या कहा ITR नहीं तो लोन नहीं "  जानने के लिए यहाँ क्लिक करे       

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

SBI का होम लोन रिफंड होगा रुके हुऐ प्रोजेक्ट पर

कैश सैलरी। क्या अपनी प्रॉपर्टी पर लोन मिलेगा ?

मानसून weather

लॉक डाउन में ऑनलाइन शराब की डिलीवरी